Showing posts with label True or False. Show all posts
Showing posts with label True or False. Show all posts



कुछ लोग बातचीत या लेखन में प्रायः कुछ विशेष रंग-रूप वाले लोगों के लिए 'आदिवासी' शब्द का प्रयोग करते हैं। सच तो यह है कि अंग्रेजों ने उनमें और शेष भारतवासी हिन्दुओं में फूट डालने के लिए यह शब्द गढ़ा था। उन्होंने कहा कि भारत के शहरों और गांवों में रहने वाले हिन्दू तो आर्य हैं, जो बाहर से आये और व्यापार तथा खेती पर अधिकार कर लिया। उन्होंने यहां के मूल निवासियों को वन और पर्वतों में खदेड़ दिया। अंग्रेजों ने कई इतिहासकारों को अपने जाल में फंसाकर यह सिद्धान्त पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल करा लिया। इस कारण गुलामी काल में हम यही पढ़ते और समझते रहे।

पर अंग्रेजों के जाने के बाद भी इतिहास की इस भयानक भूल को सुधारा नहीं गया। यह सिद्धान्त पूर्णतः भ्रामक है। जैसे नगरों में रहने वाले नगरवासी हैं, वैसे ही ग्रामवासी, पर्वतवासी और वनवासी भी हैं। मौसम, खानपान और काम के प्रकार से लोगों के रंग-रूप में परिवर्तन भले ही हो जाए; पर इससे वे किसी और देश के वासी नहीं हो जाते। श्रीराम ने लाखों वर्ष पूर्व इन्हीं वन और पर्वतवासियों को साथ लेकर तब से सबसे बड़े आतंकवादी रावण को मारा था।

श्रीराम और श्रीकृष्ण का वंशज होने के नाते मैं तो स्वयं को इसी भारतभूमि का आदिवासी मानता हूं। मेरे पुरखे लाखों-करोड़ों वर्ष से यहीं रह रहे हैं। जो अंग्रेज और अंग्रेजपरस्त इतिहासकारों के झूठे सिद्धान्तों पर विश्वास कर स्वयं को भारत का आदिवासी नहीं मानते, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे किस देश, दुनिया या ग्रह के आदिवासी हैं; वे कितने साल या पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं; वे कब तक इस पावन धरा पर बोझ बन कर रहेंगे और अपने पुरखों के संसार में ही क्यों नहीं चले जाते ?

Posted by Unknown Wednesday, June 13, 2012 0 comments